NCERT का बड़ा बदलाव: इतिहास से भूगोल तक बदला सिलेबस, 2026-27 से नई किताबों में पढ़ेंगे छात्र

एनसीईआरटी ने सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। अब चार किताबों को दो भागों में पढ़ाया जाएगा और इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र व नागरिकशास्त्र में कई नए विषय शामिल किए गए हैं।

NCERT का बड़ा बदलाव: इतिहास से भूगोल तक बदला सिलेबस, 2026-27 से नई किताबों में पढ़ेंगे छात्र

NCERT ने 2026-27 सत्र के लिए कक्षा 9 का सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम पूरी तरह बदला
इतिहास-भूगोल-अर्थशास्त्र-नागरिकशास्त्र की 4 किताबें अब 2 भागों में पढ़ाई जाएंगी
भूगोल में इसरो के ‘भुवन’ प्लेटफॉर्म से पढ़ाई, अर्थशास्त्र में आयकर-शेयर जैसे विषय

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 के लिए सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023) के आधार पर तैयार किए गए इस नए पाठ्यक्रम को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू किया जाएगा। नए बदलाव के तहत अब सामाजिक विज्ञान की पारंपरिक चार किताबों इतिहास, भूगोल, नागरिकशास्त्र और अर्थशास्त्र को मिलाकर दो भागों (पार्ट-A और पार्ट-B) में पढ़ाया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत कुल 16 अध्याय निर्धारित किए गए हैं। इनमें इतिहास, भूगोल और अर्थशास्त्र के चार-चार अध्याय होंगे, जबकि नागरिकशास्त्र के तीन अध्याय शामिल किए गए हैं। इसके अलावा एक नया अध्याय ‘Understanding Social Science in General for an Indian Perspective’ भी जोड़ा गया है। पूरा पाठ्यक्रम लगभग 125 घंटों में पूरा कराया जाएगा

इतिहास में हड़प्पा सभ्यता और भक्ति परंपरा पर जोर

नए पाठ्यक्रम में इतिहास के हिस्से को काफी हद तक पुनर्गठित किया गया है। इसमें प्राचीन और मध्यकालीन भारत (1200 ईस्वी तक) के विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया है। विद्यार्थियों को हड़प्पा सभ्यता, प्रारंभिक समाज और भक्ति परंपरा जैसे विषयों के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाएगा।

दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कुछ विषय पहले कक्षा 12 में पढ़ाए जाते थे, जिन्हें अब नौवीं कक्षा में शामिल कर दिया गया है। इससे विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास के शुरुआती दौर के बारे में पहले ही जानकारी मिल सकेगी।

राजनीति विज्ञान में नए और उन्नत विषय

राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम में भी बदलाव किया गया है। इसमें अब न्याय, सत्ता और चुनाव जैसे विषय शामिल किए गए हैं। पहले ये विषय वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं में पढ़ाए जाते थे, लेकिन अब इन्हें नौवीं कक्षा में पढ़ाया जाएगा ताकि विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक व्यवस्था की बेहतर समझ मिल सके।

अर्थशास्त्र में वित्तीय साक्षरता पर जोर

अर्थशास्त्र के पाठ्यक्रम में वित्तीय साक्षरता को प्रमुखता दी गई है। इसके तहत विद्यार्थियों को आयकर, बजट, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड जैसी व्यावहारिक आर्थिक अवधारणाओं से परिचित कराया जाएगा।

इसके अलावा पाठ्यक्रम में मेक इन इंडिया पहल, देश के सफल उद्यमियों की कहानियां और कौटिल्य के न्याय शास्त्र से जुड़े विचार भी शामिल किए गए हैं। साथ ही हड़प्पा काल के दौरान भारत के वैश्विक व्यापारिक संबंधों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

भूगोल की पढ़ाई में इसरो के ‘भुवन’ प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल

भूगोल की पढ़ाई को अधिक व्यावहारिक और तकनीकी बनाने के लिए इसरो के भू-स्थानिक प्लेटफॉर्म ‘भुवन’ का उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को उपग्रह तस्वीरों और वास्तविक समय के आंकड़ों के आधार पर क्षेत्रों का अध्ययन कराया जाएगा।

भाषा विषयों में भी बदली पढ़ाई की शैली

नई शिक्षा नीति के अनुरूप भाषा विषयों की पढ़ाई में भी बदलाव किया गया है। अब केवल व्याकरण आधारित पढ़ाई पर जोर देने के बजाय विद्यार्थियों में अर्थपूर्ण अभिव्यक्ति, आलोचनात्मक सोच और संवाद कौशल विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा।

अंग्रेजी विषय के लिए ‘कावेरी’ नामक नई पाठ्यपुस्तक प्रस्तावित की गई है, जिसमें भारतीय संदर्भों से जुड़े साहित्यिक और गैर-साहित्यिक पाठ शामिल किए गए हैं।

विशेषज्ञों ने बताया स्वागत योग्य बदलाव

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम में यह बदलाव काफी समय से अपेक्षित था। शिक्षकों के अनुसार नए पाठ्यक्रम में वैदिक युग, भारतीय गणतंत्र और भारतीय इतिहास की समृद्ध परंपराओं को शामिल करने से विद्यार्थियों में देश के इतिहास और संस्कृति के प्रति नई जागरूकता पैदा होगी।