अंबाला बिल्डिंग हादसा: मृतकों के परिजनों का हंगामा, ₹8 लाख में समझौते का आरोप; 10 लाशें होने का दावा, 4 के गायब होने की बात कही

अंबाला बिल्डिंग हादसे में छह मौतों के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। ₹8 लाख में समझौते और चार शव गायब होने का आरोप लगाकर जांच की मांग की।

अंबाला बिल्डिंग हादसा: मृतकों के परिजनों का हंगामा, ₹8 लाख में समझौते का आरोप; 10 लाशें होने का दावा, 4 के गायब होने की बात कही

➤ मृतकों के परिजनों ने अस्पताल में धरना देकर लगाए गंभीर आरोप
➤ ₹8 लाख में समझौते के लिए व्यक्ति भेजने का आरोप
➤ अनिल विज के सामने भी हंगामा, SIT जांच की बात सामने आई


हरियाणा के अंबाला में निर्माणाधीन तीन मंजिला बिल्डिंग गिरने के हादसे के बाद सोमवार को अंबाला सिटी अस्पताल में मृतकों के परिजनों और अन्य लोगों ने जमकर हंगामा किया। हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और कई मजदूर घायल हुए हैं। राहत एवं बचाव अभियान के बाद मृतकों की संख्या छह तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

सोमवार दोपहर मृतकों के परिजन अस्पताल में धरने पर बैठ गए। करीब साढ़े 3 बजे प्रदर्शन के दौरान लोगों ने आरोप लगाया कि बिल्डिंग मालिक की ओर से एक व्यक्ति उनके पास आया था और ₹8 लाख में समझौता करने की बात कही गई। इस आरोप के बाद मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसी दौरान एक महिला के बेहोश होने की भी बात सामने आई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बीच-बचाव किया और संबंधित व्यक्ति को अपने साथ ले गई।

परिजनों और मौके पर मौजूद लोगों ने हादसे की जांच को लेकर कई सवाल उठाए। उनका आरोप था कि निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई और बिल्डिंग को जल्दबाजी में तैयार किया जा रहा था। हादसे के दौरान बड़ी संख्या में मजदूर अलग-अलग मंजिलों पर काम कर रहे थे।

अस्पताल पहुंचे मंत्री अनिल विज के सामने लोगों ने हादसे पर कड़ी नाराजगी जताई। उधर, पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा मृतकों के परिवारों के साथ अस्पताल में धरने पर बैठे।

अस्पताल में परिजनों का हंगामा, पुलिस ने संभाली स्थिति

मृतकों के परिजनों का कहना था कि हादसे की पूरी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के वास्तविक मृतकों की संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

परिजनों ने दावा किया कि मौके पर 10 लोगों की लाशें थीं, जबकि आधिकारिक तौर पर छह लोगों की मौत बताई जा रही है। उन्होंने चार शवों के गायब किए जाने का आरोप लगाया। हालांकि, यह दावा परिजनों की ओर से लगाया गया आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। उपलब्ध आधिकारिक रिपोर्टों में हादसे में मृतकों की संख्या छह बताई गई है।

अनिल विज के सामने भी जताई नाराजगी

इससे पहले सोमवार सुबह कैबिनेट मंत्री अनिल विज भी घायलों से मिलने सिविल अस्पताल पहुंचे थे। वहां मौजूद लोगों ने हादसे को लेकर उनके सामने भी नाराजगी जताई और निर्माण कार्य में कथित लापरवाही के आरोप लगाए।

लोगों ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण को लेकर पहले भी शिकायतें और सवाल उठते रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी।

मामले को लेकर SIT से जांच कराने की बात भी सामने आई है। प्रशासनिक स्तर पर बिल्डिंग के निर्माण, जमीन और संबंधित रिकॉर्ड की जांच किए जाने की बात कही गई है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा भी धरने पर पहुंचे

मृतकों के परिवारों के धरने की जानकारी मिलने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिजनों को अपने निजी कोष से 1-1 लाख रुपये और घायलों को 25-25 हजार रुपये देने की बात कही।

धरने के दौरान परिवारों ने हादसे की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई।

अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज

जानकारी के मुताबिक, बलदेव नगर थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 105, 110, 289 और 290 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं में गैर-इरादतन हत्या, गैर-इरादतन हत्या करने का प्रयास तथा मशीनरी और निर्माण कार्य में लापरवाही से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

पुलिस की ओर से मामले में जांच आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों की ओर से इस मामले के सभी आरोपों पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

तीनों मंजिलों पर चल रहा था निर्माण कार्य

हादसे के समय बिल्डिंग की अलग-अलग मंजिलों पर मजदूर काम कर रहे थे। मजदूर कर्मजीत के अनुसार, पहली मंजिल पर प्लास्टर, दूसरी मंजिल पर फर्श और तीसरी मंजिल पर लेंटर डालने का काम चल रहा था।

उनके मुताबिक, पहली मंजिल पर करीब 6 से 7 लोग, दूसरी मंजिल पर 3 लोग और तीसरी मंजिल पर करीब 10 से 12 लोग काम कर रहे थे। दोपहर करीब 3 बजे से 3:30 बजे के बीच अचानक लेंटर नीचे बैठ गया और देखते ही देखते बिल्डिंग का पिछला हिस्सा भरभराकर गिर गया।

हादसे के दौरान कुछ मजदूरों ने ऊपर से कूदकर अपनी जान बचाई, जबकि कई लोग मलबे में दब गए। हादसे के बाद राहत एवं बचाव टीमों ने मलबा हटाकर मजदूरों को बाहर निकाला। अधिकारियों के अनुसार हादसे में छह लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए।

गलत शटरिंग का भी लगाया गया आरोप

बिहार के पूर्णिया निवासी मजदूर रामचंद्र ने आरोप लगाया कि वह भी इसी बिल्डिंग में काम करता था। उसके मुताबिक, करीब दो दिन पहले लेंटर डालने के लिए शटरिंग की गई थी, लेकिन शटरिंग ठीक तरीके से नहीं की गई थी।

रामचंद्र का कहना है कि उसने शटरिंग की स्थिति देखकर काम छोड़ दिया था। उसका आरोप है कि गलत शटरिंग के कारण ही बिल्डिंग का हिस्सा गिरा। इस आरोप की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

करीब 15 दिन के अंतराल पर डाले जा रहे थे लेंटर

मजदूर कर्ण ने बताया कि 4 जुलाई को काम शुरू हुआ था और वह 8 जुलाई को काम पर आया था। उसके अनुसार, काम शुरू होने के करीब 20 दिन बाद तीन लोग आए और उन्होंने निर्माण कार्य रुकवा दिया था।

फोरमैन के कहने पर काम बंद होने के दौरान मजदूर करीब 15 दिन तक दूसरी जगह काम करते रहे। इसके बाद बिल्डिंग का निर्माण दोबारा शुरू हुआ। मजदूर के अनुसार, करीब हर 15 दिन के बाद लेंटर डालने का काम किया जा रहा था।

हादसे वाले दिन भी ऊपर लेंटर डालने और ग्राउंड फ्लोर पर प्लास्टर का काम चल रहा था।

धमाके जैसी आवाज के बाद इलाके में छा गया धूल का गुबार

बिल्डिंग के सामने दुकान चलाने वाले किरायेदार सुमंत ने बताया कि वहां करीब तीन महीने से निर्माण कार्य चल रहा था। उसके अनुसार, रविवार दोपहर अचानक धमाके जैसी आवाज आई और सामने वाली बिल्डिंग का पिछला हिस्सा भरभराकर नीचे आ गया।

कुछ ही सेकंड में पूरे इलाके में धूल का गुबार छा गया। धूल कम होने के बाद कुछ मजदूर पहली मंजिल से छलांग लगाते दिखाई दिए। कई मजदूरों को चोटें आईं। सुमंत के मुताबिक, रामगोपाल यादव, भूपेश कुमार और संतोष सिंह समेत कुछ मजदूरों ने जान बचाने के लिए छलांग लगाई।

मलबे से खुद बाहर निकले वेद प्रकाश

गरनाला निवासी वेद प्रकाश ने बताया कि वह मिस्त्री और अन्य मजदूरों के साथ ग्राउंड फ्लोर पर प्लास्टर का काम कर रहे थे। अचानक लेंटर उनके ऊपर गिर पड़ा।

मलबे में दबने से उनके हाथ में चोट आई और ऊपर ईंटें व सरिये पड़े हुए थे। काफी मशक्कत के बाद उन्होंने खुद को मलबे से बाहर निकाला। करीब 10 मिनट बाद अन्य लोग वहां पहुंचे और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।

बाद में उन्हें पता चला कि उनके साथ काम कर रहे चार मिस्त्री और मजदूरों की जान चली गई थी।

13 जून को दिया गया था निर्माण का ठेका

राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, जमीन को वर्ष 2019 में पंचकूला निवासी अजय ने गांव गोली की महिला प्रीतम कौर को बेचा था। जमीन की चौड़ाई 25 फीट और लंबाई 123.6 फीट बताई गई है।

बिल्डिंग निर्माण का ठेका 13 जून 2026 को महिला की ओर से ठेकेदार मलकीत सिंह को दिया गया था। जानकारी के मुताबिक, ठेका 200 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से हुआ था और ठेकेदार को एडवांस राशि भी दी जा चुकी थी।

DC बोले- बिल्डिंग के रिकॉर्ड की जांच होगी

DC सचिन गुप्ता ने कहा कि बिल्डिंग का निर्माण कब शुरू हुआ था, इसकी जांच कराई जा रही है। यह भी पता लगाया जाएगा कि बिल्डिंग अनऑथराइज्ड थी या नहीं।

उन्होंने कहा कि नगर निगम और तहसील से बिल्डिंग तथा जमीन से संबंधित रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अंबाला हादसे की शुरुआती आधिकारिक जानकारी में भी निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत के ढहने और छह लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। पुलिस, प्रशासन और राहत एजेंसियों ने बचाव अभियान चलाया था।