₹5 हजार दो, प्रॉपर्टी ID में नाम ठीक होगा! करनाल नगर निगम का क्लर्क ACB के जाल में फंसा
करनाल नगर निगम के क्लर्क पर प्रॉपर्टी ID में नाम ठीक करने के बदले ₹5 हजार रिश्वत मांगने का आरोप लगा। ACB ने पुराने बस स्टैंड पर ट्रैप लगाकर पकड़ा।
➤ प्रॉपर्टी ID में नाम ठीक करने के बदले ₹5 हजार रिश्वत मांगने का आरोप
➤ पुराने बस स्टैंड पर कैमिकल लगे नोट लेते ही ACB ने क्लर्क को दबोचा
➤ नगर निगम ऑफिस से ACB कार्यालय ले जाकर आरोपी से पूछताछ, जांच जारी
करनाल। हरियाणा के करनाल नगर निगम में प्रॉपर्टी ID में नाम ठीक कराने के बदले रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने नगर निगम के क्लर्क गौरव राणा को कथित तौर पर ₹5 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। शिकायतकर्ता कुलदीप ने आरोप लगाया था कि उसकी प्रॉपर्टी ID में हुई गलती ठीक करने के बदले क्लर्क ने उससे पांच हजार रुपये मांगे थे। शिकायत मिलने के बाद ACB ने ट्रैप की कार्रवाई की और मंगलवार सुबह पुराने बस स्टैंड पर रिश्वत के पैसे लेते ही आरोपी को पकड़ लिया।
मामले के अनुसार, कुलदीप करीब एक सप्ताह से नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगा रहा था। वह अपनी प्रॉपर्टी ID में दर्ज नाम की गलती को ठीक करवाना चाहता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात नगर निगम के क्लर्क गौरव राणा से हुई। आरोप है कि काम को ठीक कराने के बदले क्लर्क ने उससे ₹5 हजार रिश्वत की मांग की। इसके बाद शिकायतकर्ता ने मामले की जानकारी ACB को दी और कार्रवाई की मांग की।
शिकायत मिलने के बाद ACB ने आरोपी को पकड़ने के लिए ट्रैप तैयार किया। कार्रवाई के तहत रिश्वत के लिए दिए जाने वाले नोटों पर विशेष कैमिकल पाउडर लगाया गया और उनके नंबर भी दर्ज किए गए। इसके बाद शिकायतकर्ता कुलदीप को वही नोट देकर आरोपी के पास भेजा गया, ताकि रिश्वत की मांग और लेनदेन को कार्रवाई के दौरान पकड़ा जा सके।
बताया गया है कि गौरव राणा ने शिकायतकर्ता को करनाल के पुराने बस स्टैंड पर बुलाया था। मंगलवार सुबह करीब 9 बजे कुलदीप वहां पहुंचा। जैसे ही उसने आरोपी को पांच हजार रुपये दिए, पहले से तैयार ACB टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी के हाथों पर कैमिकल पाउडर के निशान भी मिले। इस तरह ACB ने रिश्वत लेने के आरोप में क्लर्क को मौके से हिरासत में ले लिया।
नगर निगम ऑफिस की बजाय बस स्टैंड पर क्यों बुलाया?
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोपी क्लर्क ने कथित तौर पर ACB की कार्रवाई के डर से नगर निगम कार्यालय के बजाय पुराने बस स्टैंड को मिलने की जगह चुना। नगर निगम कार्यालय में अलग-अलग स्थानों पर कैमरे लगे होने के कारण आरोपी ने शिकायतकर्ता को बाहर बुलाने की योजना बनाई थी। हालांकि, ACB को पहले से इसकी जानकारी थी और टीम ने उसी स्थान पर ट्रैप लगाकर कार्रवाई कर दी।
यानी आरोपी को लगा कि नगर निगम कार्यालय से बाहर मिलने पर रिश्वत का लेनदेन आसानी से हो जाएगा, लेकिन शिकायतकर्ता की शिकायत के बाद ACB ने पूरी योजना के साथ कार्रवाई की और पैसे लेते ही उसे पकड़ लिया।
कैमिकल लगे नोटों से हुई कार्रवाई
ACB की ट्रैप कार्रवाई में शिकायतकर्ता को दिए गए नोटों पर पहले से केमिकल लगाया गया था। नोटों के नंबर भी दर्ज किए गए थे। इस तरह टीम के पास रिश्वत के लेनदेन को सत्यापित करने के लिए कार्रवाई से पहले की तैयारी मौजूद थी।
रिश्वत के पैसे आरोपी तक पहुंचते ही ACB टीम ने उसे पकड़ लिया। आरोपी के हाथों पर पाउडर के निशान मिलने की जानकारी भी सामने आई है। इस कार्रवाई के बाद टीम आरोपी को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई।
पहले नगर निगम ऑफिस, फिर ACB कार्यालय ले गई टीम
रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद ACB की टीम आरोपी गौरव राणा को पहले करनाल नगर निगम कार्यालय लेकर पहुंची। इसके बाद उसे ACB कार्यालय ले जाया गया। इंस्पेक्टर अरविंद कुमार के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है और पूरे मामले से जुड़े तथ्यों को खंगाला जा रहा है।
हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की करनाल रेंज का आधिकारिक कार्यालय करनाल के सेक्टर-7 में है। ACB की करनाल रेंज के आधिकारिक रिकॉर्ड में 2026 के मामलों के लिए FIR सूची भी उपलब्ध है।
एक सप्ताह से नगर निगम के चक्कर लगा रहा था शिकायतकर्ता
इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता की परेशानी भी सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, कुलदीप करीब एक सप्ताह से प्रॉपर्टी ID में नाम ठीक कराने के लिए नगर निगम कार्यालय जा रहा था। इसी दौरान कथित तौर पर क्लर्क गौरव राणा ने उससे काम कराने के बदले पैसे की मांग की।
कुलदीप ने रिश्वत देने के बजाय ACB से शिकायत करना उचित समझा। इसके बाद ACB ने शिकायत की जानकारी के आधार पर ट्रैप की योजना तैयार की और शिकायतकर्ता को कार्रवाई में शामिल किया।
जांच के बाद सामने आएंगे आगे के तथ्य
फिलहाल ACB ने आरोपी क्लर्क को पकड़ लिया है और मामले की जांच जारी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि प्रॉपर्टी ID में नाम सुधारने के मामले में रिश्वत की मांग किस तरह की गई, आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच क्या बातचीत हुई और इस मामले से जुड़े अन्य तथ्य क्या हैं।
ACB की कार्रवाई के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। आरोपी पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी। अभी इस मामले में आरोपी को दोषी ठहराया जाना न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
यह कार्रवाई एक बार फिर दिखाती है कि रिश्वत से जुड़े मामलों में शिकायत मिलने के बाद ACB ट्रैप कार्रवाई के जरिए सरकारी कर्मचारियों को रंगे हाथ पकड़ने की प्रक्रिया अपनाती है। हरियाणा ACB की आधिकारिक वेबसाइट पर करनाल रेंज के 2026 के FIR रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।
Akhil Mahajan