वाटिका ग्रुप के CMD और प्रमोटर गिरफ्तार
वाटिका ग्रुप के अनिल भल्ला और गौतम भल्ला गिरफ्तार हुए। गुरुग्राम कोर्ट ने 3 अक्टूबर तक ED रिमांड दी। जांच में 260 करोड़ रुपये के प्लॉट सौदे शामिल हैं।
➤ अनिल भल्ला और गौतम भल्ला गिरफ्तार, 3 अक्टूबर तक ED रिमांड
➤ 260 करोड़ रुपये लेने के बाद प्लॉट डिलीवरी नहीं करने का आरोप
➤ तलाशी में Mercedes-Benz GLC 300, सोना-हीरे और 3.04 करोड़ रुपये के बैंक खाते मिले
गुरुग्राम। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुरुग्राम जोनल कार्यालय ने रियल एस्टेट कंपनी मैसर्स वाटिका लिमिटेड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है। दोनों को गुरुग्राम की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 3 अक्टूबर 2026 तक ED की रिमांड में भेज दिया। यह मामला होमबायर्स और निवेशकों से कथित तौर पर रकम लेने के बावजूद आवासीय प्लॉटों की डिलीवरी नहीं करने और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच से संबंधित है। इससे पहले ED ने PMLA की धारा 17 के तहत सात परिसरों में तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान आरोपियों में से एक के आवासीय परिसर से Mercedes-Benz GLC 300, करीब 1.55 करोड़ रुपये मूल्य के 1.3 किलोग्राम से अधिक वजन के सोने और हीरे के आभूषण तथा करीब 3.04 करोड़ रुपये के बैंक खाते और FDR बरामद कर फ्रीज किए गए थे।
आवासीय प्लॉट देने के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप
ED की जांच होमबायर्स और निवेशकों के साथ कथित बड़े पैमाने के फ्रॉड से जुड़े मामले में आगे बढ़ी। वाटिका लिमिटेड और उसके प्रमोटर-डायरेक्टर अनिल भल्ला, गौतम भल्ला, गौरव भल्ला और अन्य के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने कई FIR दर्ज की थीं। इन मामलों में धोखाधड़ी के जरिए प्रलोभन देने, रकम लेने के बावजूद आवासीय प्लॉटों की डिलीवरी नहीं करने और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए थे। इन्हीं FIR को आधार बनाकर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।
260 करोड़ रुपये का भुगतान, लेकिन प्लॉट नहीं मिले
ED की जांच के मुताबिक, वर्ष 2010 और 2012 के बीच सात खरीदार संस्थाओं ने मैसर्स वाटिका लिमिटेड को गुरुग्राम के वाटिका इंडिया नेक्स्ट सेक्टर 84/85 और वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 सेक्टर 88ए प्रोजेक्ट्स में रेजिडेंशियल प्लॉटों के लिए अग्रिम सेल कंसिडरेशन के तौर पर करीब 260 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।
इसके बाद वर्ष 2014 और 2015 में प्लॉट-वाइज एग्रीमेंट किए गए। जांच के अनुसार बाद में प्रोजेक्ट के लेआउट में बदलाव किया गया और पहले आवंटित प्लॉटों को रीनंबर तथा रीलोकेट किया गया। इसी दौरान प्रोजेक्ट की जमीन को अन्य खरीदारों को आवंटित और बेचे जाने की बात भी जांच में सामने आई।
140.73 करोड़ रुपये कीमत के प्लॉट अभी तक अनडिलीवर्ड
ED के अनुसार, वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 में करीब 90 करोड़ रुपये में खरीदे गए 1.10 लाख वर्ग गज में से एक भी प्लॉट करीब 14 साल बीत जाने के बाद भी डिलीवर नहीं किया गया है। वहीं वाटिका इंडिया नेक्स्ट में प्लॉटों की डिलीवरी केवल आंशिक रही।
जांच के अनुसार, इस तरह करीब 140.73 करोड़ रुपये मूल्य के प्लॉटों का बड़ा हिस्सा अभी भी अनडिलीवर्ड है।
अनिल और गौतम भल्ला पर फैसलों में भूमिका का आरोप
जांच में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर ED का कहना है कि अनिल भल्ला ने जांच के दायरे में आने वाले लेनदेन से जुड़े प्रमुख फैसलों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की। वहीं समूह के प्रमुख प्रमोटर गौतम भल्ला ने महत्वपूर्ण समझौतों को एक्जिक्यूट किया और डायरेक्टर के तौर पर उन संस्थाओं पर नियंत्रण रखा जिनके पास परियोजना की जमीन का मालिकाना हक था।
ED के अनुसार, गौतम भल्ला समूह के संचालन का प्रबंधन भी करते रहे। एजेंसी द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों से यह भी पता चलने की बात कही गई है कि कई बड़े फैसले दोनों व्यक्तियों ने संयुक्त रूप से लिए।
22 ग्रुप कंपनियों के जरिए रखी गई प्रोजेक्ट की जमीन
जांच में यह भी पाया गया कि परियोजना की जमीन करीब 22 ग्रुप कंपनियों के माध्यम से रखी गई थी। ED के अनुसार, इन कंपनियों में कोई कर्मचारी या अलग व्यावसायिक गतिविधियां नहीं थीं। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से कॉर्पोरेट गारंटी देने और वित्तीय संस्थानों को जमीन के लैंड बैंक के प्रबंधन, जिसमें उसका मॉर्गेज भी शामिल था, के लिए किया जाता था।
खरीदारों से मिले धन के ट्रांसफर की भी जांच
ED ने मैसर्स वाटिका लिमिटेड के बैंक खातों की भी जांच की। एजेंसी के विश्लेषण के अनुसार, खरीदारों से प्राप्त रकम का इस्तेमाल केवल उन्हीं परियोजनाओं के लिए नहीं किया गया, जिनके लिए पैसा लिया गया था। जांच में रकम को अन्य समूह कंपनियों और प्रमोटर से जुड़ी ऐसी संस्थाओं में ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई, जो संबंधित परियोजनाओं का हिस्सा नहीं थीं।
473.18 करोड़ रुपये के अलग लेनदेन की भी जांच
जांच में वर्ष 2024 के एक अलग लेनदेन का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, स्केलर वेंचर्स ने एक 'बिक्री समझौते' और 'बाय-बैक समझौते' के तहत 473.18 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।
कुल 165 भूखंडों में से केवल 15 भूखंडों को वापस खरीदा गया। इसके बाद शेष 150 भूखंडों में से 14 को कथित तौर पर स्केलर की जानकारी या सहमति के बिना करीब 13.62 करोड़ रुपये में तीसरे पक्ष को बेच दिया गया।
ED की जांच के अनुसार, इस मामले में फिलहाल प्रमाणित अपराध की कमाई करीब 154.36 करोड़ रुपये है।
Akhil Mahajan